સોમવાર, 8 જૂન, 2026

ભારત દેશનો વિસ્તાર

ભારત
વિશ્વનો સાતમો સૌથી મોટો દેશ છે અને વસ્તીની દૃષ્ટિએ વિશ્વનો સૌથી મોટો દેશ છે
.

🇮🇳 ભારત દેશનો વિસ્તાર

  • કુલ વિસ્તાર: 32,87,263 ચોરસ કિલોમીટર
  • વિશ્વના કુલ ભૂમિ વિસ્તારનો લગભગ 2.4% ભાગ
  • ઉત્તરથી દક્ષિણ લંબાઈ: લગભગ 3,214 કિમી
  • પૂર્વથી પશ્ચિમ પહોળાઈ: લગભગ 2,933 કિમી
  • જમીની સરહદ: લગભગ 15,200 કિમી
  • દરિયાકિનારો: લગભગ 7,516 કિમી



🏛ભારતના રાજ્ય અને કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ

ભારતમાં હાલમાં:

  • 28 રાજ્ય (States)
  • 8 કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ (Union Territories)

28 રાજ્યો

  1. આંધ્ર પ્રદેશ
  2. અરુણાચલ પ્રદેશ
  3. આસામ
  4. બિહાર
  5. છત્તીસગઢ
  6. ગોવા
  7. ગુજરાત
  8. હરિયાણા
  9. હિમાચલ પ્રદેશ
  10. ઝારખંડ
  11. કર્ણાટક
  12. કેરળ
  13. મધ્ય પ્રદેશ
  14. મહારાષ્ટ્ર
  15. મણિપુર
  16. મેઘાલય
  17. મિઝોરમ
  18. નાગાલેન્ડ
  19. ઓડિશા
  20. પંજાબ
  21. રાજસ્થાન
  22. સિક્કિમ
  23. તમિલનાડુ
  24. તેલંગાણા
  25. ત્રિપુરા
  26. ઉત્તર પ્રદેશ
  27. ઉત્તરાખંડ
  28. પશ્ચિમ બંગાળ

🏢 8 કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ

  1. અંડમાન અને નિકોબાર દ્વીપસમૂહ
  2. ચંદીગઢ
  3. દાદરા અને નગર હવેલી તથા દમણ અને દીવ
  4. દિલ્હી
  5. જમ્મુ અને કાશ્મીર
  6. લદ્દાખ
  7. લક્ષદ્વીપ
  8. પુડુચેરી

🏘ભારતના ગામો

ભારતને "ગામડાઓનો દેશ" પણ કહેવામાં આવે છે.

  • ભારતના ગામોની સંખ્યા: લગભગ 6.6 લાખ (6,64,000થી વધુ)
  • લગભગ 65% થી વધુ વસ્તી ગામડાઓમાં રહે છે.
  • ગામોનું સંચાલન ગ્રામ પંચાયત દ્વારા થાય છે.
  • ભારતભરમાં આશરે 2.5 લાખથી વધુ ગ્રામ પંચાયતો કાર્યરત છે.

ગામડાઓનું મહત્વ

  • કૃષિ અને પશુપાલનનું મુખ્ય કેન્દ્ર
  • દેશના ખાદ્ય ઉત્પાદનનો આધાર
  • પરંપરાગત કલા, સંસ્કૃતિ અને લોકવારસાનું સંરક્ષણ
  • ગ્રામ વિકાસ દ્વારા દેશના આર્થિક વિકાસમાં મહત્વપૂર્ણ ફાળો

📊 ભારત એક નજરમાં

માહિતી

વિગત

રાજધાની

નવી દિલ્હી

કુલ વિસ્તાર

32,87,263 ચો. કિમી

રાજ્યો

28

કેન્દ્રશાસિત પ્રદેશ

8

જિલ્લાઓ

800+

ગામો

6.6 લાખથી વધુ

વસ્તી

140 કરોડથી વધુ

સત્તાવાર ભાષાઓ

22 અનુસૂચિત ભાષાઓ

રાષ્ટ્રીય પ્રાણી

બંગાળ વાઘ

રાષ્ટ્રીય પક્ષી

ભારતીય મોર

ભારત વિશ્વનું સૌથી મોટું લોકશાહી રાષ્ટ્ર છે અને તેની વિવિધતા, સંસ્કૃતિ, ભાષાઓ અને ગામડાઓ દેશની સૌથી મોટી શક્તિ ગણાય છે.

 


શુક્રવાર, 5 જૂન, 2026

जल है तो जीवन है-1

  जल है तो जीवन है

हम सब जानते हैं कि जल ही जीवन है और जल हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसके बिना हमारा जीवन यापन संभव नहीं है। बिना जल के हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। पृथ्वी का लगभग 71% भाग समुंदरों महासागरों नदियों और ग्लेशियर के रूप में ही पाया जाता है और 71% जल से ढका हुआ है, लेकिन इसमें से मात्र 1% सी मानव के लिए उपयुक्त है, जिसका मानव प्रयोग कर सकता है।

जल केवल मनुष्य के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि पृथ्वी पर जितने भी प्रजातियां हैं। वह सब जल पर ही निर्भर रहती हैं पृथ्वी पर उपस्थित लगभग सभी प्राणी अपने जीवन का निर्वाह सिर्फ जल के बलबूते पर ही करते हैं। जिस तरह से जल की दिन-प्रतिदिन कमी होती जा रही है, इससे कई प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं। इसीलिए हमें चाहिए कि हम जल संरक्षण पर ध्यान दें।

जल है तो जीवन है

हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जल है और हमें यह जीवन यापन करने के लिए बहुत ही जरूरी है। जल के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। अगर हमें पृथ्वी पर अपना जीवन बनाए रखना है, तो हमें जल की आवश्यकता जरूर होती है।

पानी सिर्फ पीने की ही काम नहीं आता है, बल्कि हमारे अन्य कामों के लिए भी जल को काम में लिया जाता है। जैसे कि नहाना, कपड़े धोना, खाना बनाना, बागवानी करना और भी हमारे दिन में जाने कितने काम होते हैं, जिनमें हमें पानी की बहुत ही ज्यादा जरूरत पड़ती है।

पृथ्वी पर जितने भी पेड़ पौधे और जीव जंतु उपस्थित है, वह सब पानी पर ही निर्भर रहते हैं। अगर पानी नहीं होगा तो इनकी वृद्धि और विकास रुक जाएगा, जिससे पूरा पर्यावरण तंत्र और खाद्य श्रंखला बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाएगी। इसीलिए हमें चाहिए कि अगर हमें जीवन पर अपना फलता फूलता जीवन यापन करना है तो हमें पानी का संरक्षण करना होगा।

पानी संरक्षण की आवश्यकता

विश्व में कई सारी जगहों पर बहुत ही कम वर्षा होती है, जिसकी वजह से वहां सुखा आने की स्थिति हो जाती है। कई लोग निचले स्तर की वजह से पानी की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। कई सारे जगहों पर भूजल या तो गंदा हो चुका है या फिर बारिश की कमी के कारण उसकी पूर्ति नहीं हो पाती है। इन सभी कारणों की वजह से कई जगहों पर पानी की दिन-प्रतिदिन कमी बढ़ती ही जा रही है।

औद्योगीकरण और शहरीकरण के जैसे वजह से भूजल में कमी में वृद्धि हुई है, क्योंकि इन सभी के विकास के लिए तेजी से पानी की मांग बढ़ती जा रही है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार यह बताया गया कि प्रति 9 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति लगभग 84.4 करोड़ लोगों को आज भी शुद्ध पानी बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

इन आंकड़ों को देखते हुए यह पता चलता है कि पानी की समस्या कितनी गंभीर होती जा रही है और इस गंभीर समस्या को हम टाल नहीं सकते हैं। इसके लिए हमें अभी से ही प्रयास शुरु करना होगा कि हम जल का संरक्षण करें और अपने आने वाली पीढ़ियों को और अपने भविष्य को बेहतर बना सके।

पानी संरक्षण की पहल

पानी संरक्षण की पहल के चलते लोगों में जागरूकता फैलाई जा रही है और उन्हें इसके महत्व के बारे में बताया जा रहा है कि किस तरह से जल को संरक्षित किया जाए। जल संरक्षण अभियान लोगों को इस बात का एहसास दिलाता है कि हमारे लिए पृथ्वी पर जल की बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है और यह हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

हमें अपने भविष्य के लिए जल को संरक्षण करना चाहिए और इस बात का भी ज्ञान कराता है कि स्वच्छ और साफ पानी के स्रोत काफी सीमित हो चुके हैं। उनका अत्यधिक उपयोग करने पर वह जल्द ही समाप्त हो जाएंगे, जिसकी वजह से मानव अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो सकता है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं पृथ्वी का 71% भाग पानी से ढका हुआ है, परंतु इस पृथ्वी पर जितना भी पानी उपलब्ध है, वह हमारे लिए बिल्कुल भी काम का नहीं है। उसमें से सिर्फ 1% ही जल काम के लायक है और उसे हम उपयोग कर सकते हैं। इसीलिए हमें जिम्मेदार नागरिक बनकर पानी का संरक्षण शुरू कर देना चाहिए।

पानी बचाओ जीवन बचाओ

अगर हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ही पानी रह जाएगा और आने वाली पीढ़ी के लिए बिल्कुल भी पानी नहीं बचेगा तो इससे हमारा जीवन संकट में जाएगा। इसीलिए कहा जाता है पानी बचाओ और जीवन बचाओ पानी बचाओ तभी हम अपने जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं।

जिस तरह से जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है, उस तरह से पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है। भारत का प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन 1 लीटर पानी भी बचाएगा तो इससे बहुत बड़ा बदलाव सकता है, क्योंकि आप का 1 लीटर बचाया वह पानी किसी अन्य व्यक्ति के काम सकता है और किसी और को स्वच्छ जीवन दे सकता है।

अगर किसी के पास पीने के लिए स्वच्छ पानी और उसकी सुविधा नहीं है तो आपको चाहिए कि आप उनकी मदद करें। यह छोटे छोटे कदम ही हम लोगों के जल संरक्षण और लोगों की मददगार तरीके से साबित हो सकते हैं।

पानी को कैसे बचाएं?

·        जिस समय हम दाढ़ी बनाते हैं या ब्रश करते हैं, उस समय अगर पानी का इस्तेमाल नहीं हो रहा हो तो आपको नल बंद कर देना चाहिए।

·        हमें ऐसे फ्लशिंग सिस्टम का उपयोग करना चाहिए, जो पानी की खपत को कम करता है।

·        नहाने के लिए फव्वारे का प्रयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि मग और बाल्टी का प्रयोग करना चाहिए।

·        सिंचाई के लिए पानी भर आई प्रणाली की जगह ट्रिप इरीगेशन प्रणाली का इस्तेमाल करना चाहिए।

·        अपने बागानों में शाम के समय पानी का छिड़काव करें और जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल नहीं करें।

·        सार्वजनिक स्थलों पर खुले हुए पानी के नलों को आप देखते ही तुरंत बंद कर दें अथवा हो सके तो इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को अवश्य दें।

·        अपने घरों और क्षेत्रों में बारिश के पानी के लिए संरक्षण तंत्र की जगह बनवाएं।

·        आरो फिल्टर से निकले हुए खराब पानी को व्यर्थ नहीं करना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग पौधों को सींचने और कपड़े धोने में कर सकते हैं।

निष्कर्ष

जल हमारे जीवन का आधार है, जल नहीं तो हमारा जीवन नहीं कोई मनुष्य हो जीव जंतु हो अथवा पेड़ पौधे हो सभी काजल सिर्फ जीवन पर ही टिका हुआ है। अगर पानी उपलब्ध नहीं होगा तो हम थोड़े समय तक जीवित रह सकते हैं। इसके पश्चात हमारा जीवन समाप्त हो जाएगा, इसीलिए हम पानी के संरक्षण की शुरुआत करें पानी को बर्बाद ना करें और पृथ्वी का संतुलन बनाए रखें।

अंतिम शब्द

आज हमने आपको पानी बचाने के महत्व और तरीकों के बारे में बताया है। आशा करते हैं कि आप भी इन तरीकों को जरूर अपनाएंगे और पानी को व्यर्थ नहीं करेंगे और आपको इससे संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए वह तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

 

 

 

हम हमेशा से सुनते आये हैं जल ही जीवन है जल के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल है जीवन के सभी कार्यों का निष्पादन करने के लिये जल की आवश्यकता होती है।

 

जैसे जैसे गर्मी बढ़ रही है देश के कई हिस्सों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। प्रतिवर्ष यह समस्या पहले के मुकाबले और बढ़ती जाती है। लातूर जैसी कई जगह तो पानी की कमी की वजह से हालात अत्यन्त भयावह हो रहे हैं। लेकिन हम हमेशा यही सोचते हैं बस जैसे तैसे गर्मी का सीजन निकाल जाये बारिश आते ही पानी की समस्या दूर हो जायेगी और यह सोचकर जल सरंक्षण के प्रति बेरुखी अपनाये रहते हैं।

किन्तु आज मानव जाति के लिये जल सरंक्षण अत्यन्त महत्वपूर्ण हो गया है। यदि अब भी हम लोग जल सरंक्षण के प्रति गम्भीर नहीं हुए तो यह बात बिलकुल सही साबित होगी कि-

तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिये होगा।

जल संसाधन

जल संसाधन पानी के वह स्रोत हैं जो मानव जाति के लिये उपयोगी हैं या जिनके उपयोग में आने की सम्भावना है। पूरे विश्व में धरती का लगभग तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है किन्तु इसमें से 97% पानी खारा है जो पीने योग्य नहीं है, पीने योग्य पानी की मात्रा सिर्फ 3% है। इसमें भी 2% पानी ग्लेशियर एवं बर्फ के रूप में है। इस प्रकार सही मायने में मात्र 1% पानी ही मानव के उपयोग हेतु उपलब्ध है।

जल के स्रोतों को हम तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं

1. धरातल के ऊपर से प्राप्त जलयह बारिश का जल है जो शुद्ध होता है किन्तु सतर्कता ना रखने पर जमीन पर आते आते इसमें कई प्रकार की अशुद्धियाँ घुलने का डर रहता है।

2. धरातलीय जलनदी, तालाब, झील, झरने आदि धरातलीय जल के प्रकार हैं।

3. अन्त: धरातलीय जलकच्चे तथा पके  कुएं , बावड़ी, बोरिंग आदि।

जल सरंक्षण की आवश्यकता क्यों है ?

जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण तथा औधोगिकीकरण के कारण प्रति व्यक्ति के लिये उपलब्ध पेयजल की मात्रा लगातार कम हो रही है जिससे उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जहाँ एक ओर पानी की मांग लगातार बढ़ रही है वहीँ दूसरी ओर प्रदूषण और मिलावट के कारण उपयोग किये जाने वाले जल संसाधनों की गुणवत्ता तेजी से घट रही है।

साथ ही भूमिगत जल का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है ऐसी स्तिथि में पानी की कमी की पूर्ति करने के लिये आज जल संरक्षण की नितान्त आवश्यकता है।

जल संरक्षण के उपाय 

जल संरक्षण आज विश्व की सर्वोपरि प्राथमिकताओं में से होनी चाहिये। जल संरक्षण हमे घर में, घर के बाहर, बाग़ बगीचों, खेत खलिहान हर जगह करना चाहिये।

1. घरेलू जल सरंक्षण / How to save water at home

o   दाढ़ी बनाते समय, ब्रश करते समय, सिंक में बर्तन धोते समय, नल तभी खोलें जब सचमुच पानी की ज़रूरत हो।

o   गाड़ी धोते समय पाइप की बजाय बाल्टी मग का प्रयोग करें, इससे काफी पानी बचता है।

o   नहाते समय शॉवर की बजाय बाल्टी एवं मग का प्रयोग करें,काफी पानी की बचत होगी। इस काम के लिए आप भारत रत्न सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा ले सकते हैं जो सिर्फ बाल्टी पानी से ही नहाते हैं।

o   वाशिंग मशीन में रोज-रोज थोड़े-थोड़े कपड़े धोने की बजाय कपडे इकट्ठे होने पर ही धोएं।

o   ज्यादा बहाव वाले फ्लश टैंक को कम बहाव वाले फ्लश टैंक में बदलें। सम्भव हो तो दो बटन वाले फ्लश का टैंक खरीदें। यह पेशाब के बाद थोड़ा पानी और शौच के बाद ज्यादा पानी का बहाव देता है।

o   जहाँ कहीं भी नल या पाइप लीक करे तो उसे तुरन्त ठीक करवायें। इसमें काफी पानी को बर्बाद होने से रोका जा सकता है।

o   बर्तन धोते समय भी नल को लगातार खोले रहने की बजाये अगर बाल्टी में पानी भर कर काम किया जाए तो काफी पानी बच सकता है।

2. घर के बाहर जल संरक्षण

o   सार्वजनिक पार्क, गली, मौहल्ले, अस्पताल, स्कूलों आदि में जहाँ कहीं भी नल की टोंटियाँ खराब हों या पाइप से पानी लीक हो रहा हो तो तुरन्त जलदाय ऑफिस में या सम्बन्धित व्यक्ति को सूचना दें, इसमें हजारों लीटर पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है।

o   बाग़ बगीचों एवं घर के आस पास पौधों में पाइप से पानी देने के बजाय वाटर कैन द्वारा पानी देने से काफी पानी की बचत हो सकती है

o   बाग़ बगीचों में दिन की बजाय रात में पानी देना चाहिये। इससे पानी का वाष्पीकरण नहीं हो पाता। कम पानी से ही सिंचाई हो जाती है

o   सिंचाई क्षेत्र हेतु कृषि के लिये कम लागत की आधुनिक तकनीकों को अपनाना जल सरंक्षण हतु उपयोगी है।

3. वृक्षा रोपण / Plantation

वृक्ष हमारे अभिन्न मित्र हैं ये हमें छाया,फल,लकड़ी प्रदान करते हैं जमीन का कटाव रोकते हैं, बाढ़ से सुरक्षा करते हैं। जहाँ ज्यादा वृक्ष होते हैं वहां अच्छी बारिश होती है जिससे बारिश में नदी नाले भर जाते हैं और पानी की कमी नहीं हो पाती। इसलिए लगातार वृक्षा रोपण करते रहना चाहिये।

4. जल संरक्षण हेतु कानून 

कई क्षेत्रों में बिना रोकथाम के पानी निकालने से भूजल के स्तर में भारी गिरावट जाती है। इसके लिये भूजल के वितरण प्रबन्धन नियमों का पालन करना जरूरी है। साथ ही नए कानून बनाने की ज़रूरत है जो किसी भी प्रकार के वाटर वेस्टेज को एक गैर-कानूनी काम के रूप में देखें और ऐसा करने वालों को जुरमाना और सजा देने का प्रावधान करें।

5. औधोगिक क्षेत्र में नई तकनीक

पानी की जरूरत को कम करने लिये, औद्योगिक क्षेत्र, कारखानों आदि में आधुनिक तकनीक को प्रयोग में लेना चाहिये।

6. वर्षा जल संचयन / Rain water harvesting in Hindi

हम लोगों की अकेली यह आदत ही जल संरक्षण हेतु मील का पत्थर साबित हो सकती है। एक बारिश के बाद अगली बारिश से छतों से वर्षा जल का संचय करें। यह पीने, कपड़े धोने, बागवानी आदि सभी कार्यों हेतू उत्तम है। इसके लिये गाँव, शहरों में भवन निर्माण सम्बन्धी नियमों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया जाना चाहिये तथा लोगों को वर्षा जल संचय हेतु प्रोत्साहित किये जाने वाले उपाय ढूंढे जाने चाहियें।

7. जल जागरूकता कार्यक्रम

पानी की बर्बादी रोकने, वर्षा जल का संचयन करने, लगातार वृक्षारोपण करने तथा पानी को प्रदुषण से बचाने हेतु लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाते रहना चाहिये और यह प्रयास हम सबको मिलकर करना चाहिए।

8. वाटर ओवरफ्लो अलार्म लगाएं

छतों पर लगी टंकियों से पानी गिरकर बर्वाद होना एक आम दृश्य है। हमें इसे रोकना होगा और इसके लिए सबसे सरल उपाय है कि आप अपनी टंकी को एक water overflow alarm से जोड़ दें। इस बारे में हम डिटेल में अगली पोस्ट में बात करेंगे।

9. Flush के अन्दर पानी की बोतल में बालू-कंकड़ भर कर डाल दें

अमूमन फ्लश से ज़रूरत से अधिक पानी बहता है, इसलिए अगर आप उसमे लीटर की बोतल में बालू-कंकड़ आदि भर के डाल देते हैं तो हर एक फ्लश पे आप लिटर पानी बचा सकते हैं, और पूरे वर्ष में हज़ारों लीटर पानी बचाया जा सकता है।

फ्लश से रिलेटेड इस बात पर भी ध्यान दें कि कहीं फ्लश का नौब पूरी तरह से उठने के कारण वो leak तो नहीं हो रहा है। कई बार इस कारण से रात भर में पूरी टंकी खाली हो जाती है।

10. Water Supply के पानी को अपना पानी समझें 

जो लोग भाग्यशाली हैं उनके घरों में सरकार की तरफ से वाटर-सप्लाई का पानी भी आता है। देखा गया है कि अक्सर लोग लगभग मुफ्त में मिलने वाले इसे पानी को बहुत अधिक बवाद करते हैंवे इसे क्यारी में लगा कर छोड़ देते है (बरसात के मौसम में भी), अपने कूलर में पानी भरने के लिए लगा कर भूल जाते हैं या वाशिंग मशीन में लगा कर छोड़ देते हैं। और चूँकि ये पाने टाइम-टाइम से आता है, इसलिए कई बार लोग टोटियां खुली छोड़ कर बाकी काम में व्यस्त हो  जाते हैं और जब पाने आने का टाइम होता है तो पानी बस यूँही गिरता रहता है।

इन लापरवाहियों की वजह से वे एक ही दिन में सैकड़ों लीटर पानी बर्वाद कर देते हैं। वहीँ दूसरी और वे अपनी टंकियों में भरे पानी को लेकर बहुत सजग होते हैं।  यदि आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं तो कृपया ऐसा करना बंद करें। पानी तो पानी है, इसमें सरकारी और अपने का भेद नहीं करना चाहिए।

11. उतना ही पानी लें जितना पीना है

जब आप 1 glass RO water पीते हैं तो ध्यान रखिये कि इसे फ़िल्टर करने के प्रोसेस में 3 glass पानी waste किया जाता है। इसलिए जब भी आप गिलास में RO वाटर लें तो पूरा भर के लेने की बजाये उतना ही लें जितना पीना है। और किसी को देना भी हो तो उसे पानी ग्लास में भर कर देने की बजाये जग या water bottle के साथ गिलास दे सकते हैं। इस तरह से काफी पानी बचाया जा सकता है।

यदि आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं तो सबसे पहले वेटर पानी ला कर रख देता है, तब भी जब आपको उसकी ज़रूरत हो! इसलिए जब आप ऐसी जगह जाइए तो तभी पानी लीजिये जब वाकई में आपको उसकी need हो।

12. RO Machine या AC से निकलने वाले  waste water को उपयोग करें

RO machine द्वारा लिए गए कुल पानी का 75% part waste हो जाता है। इसलिए कोशिश करिए कि मशीन की वास्ते पाइप से जो पानी निकला रहा है उसे बकेट में इकठ्ठा कर लिया जाए या पाइप लम्बी करके उसे पौधों को सींचने के काम में लाया जाये। इसी तरह AC से निकलने वाले पानी को भी सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

13. Hand-Pump का प्रयोग करें 

पहले के जमाने में लोग हैण्ड पंप का ही प्रयोग करते थे। इस वाजह से पानी की बर्बादी बहुत कम होती थी, जिसको जितनी ज़रूर होती थी वो उतना ही पानी निकालता था। पर समय के साथ लोग मोटर से पानी भरने लगे और हैण्ड पंप को भूल गए। यदि आपके यहाँ हैण्ड पंप लगा ही हो तो कोई बात नहीं लेकिन अगर लगा है और बेकार पड़ा है तो उसे ठीक करा कर कभी-कभार प्रयोग करें। अच्छा होगा अगर हम intentionally हफ्ते का एक दिन सिर्फ हैण्ड पंप use करके पानी निकालें। ऐसा करने से कम से कम एक दिन हम सिर्फ उतना ही पानी निकालेंगे जितने की हमें सचमुच ज़रूरत है।

14. सब्जियां-फल किसी बर्तन में धोएं

कई बार लोग सब्जियों और फलों को running water से धोते हैं, अगर इसकी जगह आप किसी बड़े भगौने या बर्तन में पानी भर कर सब्जियां धोएँगे तो पानी भी कम लगेगा और वो ठीक से साफ़ भी हो पाएंगी।

15. Wash-basin का फ्लो कम कर दें 

वाश बेसिन के नीचे भी पानी कण्ट्रोल करने के लिए एक टोटी लगी होती है, अकसर वो पूरी खुली होती है, अगर आप उसे थोड़ा सा घुमा देंगे तो पानी का फ्लो अपने आप कुछ कम हो जाएगा और काफी पानी बर्वाद होने से बच पायेगा।

16. Bathroom में एक-आध बाल्टी एक्स्ट्रा रखें

अकसर गर्मियों के दिनों में टंकी का पानी बहुत गरम हो जाता है और लोग नहाते समय पहले कुछ पानी गिरा देते हैं कि उसके बाद ठंडा पानी आने लगे। ऐसा करना पड़े तो पानी गिराने की बजाये किसी बाल्टी में भर कर रख लें। और बेहतर तो ये होगा कि सुबह के टाइम ही आप बाल्टियों में पानी भर कर रख लें ताकि नहाते वक्त आपको ठंडा पानी मिल सके।

17. प्लम्बर का हल्का-फुल्का काम खुद सीखें 

अकसर देखा जाता है कि घर में मौजूद पानी के taps टपकते रहते हैं और हम उसे यूँही ignore करते रहते हैं क्योकि हम आलस में प्लम्बर को बुलाते नहीं या ये सोचते हैं कि अगर प्लम्बर को बुलायेंगे तो वो अनाप-शनाप पैसे मांगेगा और हम खुद उसे ठीक करने की हिम्मत नहीं दिखाते। लेकिन अगर हम plumbing के बेसिक सामान घर पे रखें और खुद ही छोटी-मोटी चीजें ठीक करना सीख लें तो हम बहुत सारा पानी बर्वाद होने से रोक सकते हैं। मेरी तो सलाह है कि हमें स्कूलों में बच्चों को plumbing से रिलेटेड बेसिक काम ज़रूर सिखाने चाहिए।

18. जो भी पानी बर्वाद करता है उसे रोकें

जिसमे उन्होंने जर्मनी के एक रेस्टोरेंट का अनुभव बताया था जिसमे खाना वेस्ट करने पर वहां के नागरिकों ने आपत्ति जताई थी कि भले आपने पैसे देकर खाना खरीदा हो, फिर भी आप उसे बर्वाद नहीं कर सकते क्योंकि भले पैसा पैसा आपका है पर संसाधन देश के हैं !

और यही बात हम Indians को भी समझनी होगी। पानी की बर्बादी सिर्फ उसे बर्वाद करने वाले को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करती है। अगर आपका पड़ोसी पानी बर्वाद करता है तो आपका भी वाटर-लेवल कम होता हैइसलिए इस अनमोल संसाधन को waste करिए और waste करने दीजिये।

आइये जल बचाएँ, क्योंकि जल होगा तो कल होगा

 

ભારત દેશનો વિસ્તાર

ભારત વિશ્વનો સાતમો સૌથી મોટો દેશ છે અને વસ્તીની દૃષ્ટિએ વિશ્વનો સૌથી મોટો દેશ છે . 🇮🇳 ભારત દેશનો વિસ્તાર કુલ વિસ્ત...

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